|| सूर्य शनि युति/योग ||

|| ॐ ||
|| श्री सदगुरु परमात्मने नमः ||

सूर्य शनि जन्मपत्रिका में जब भी साथ होते हैं तो ऐसे जातक जीवन में बड़ी ही कठिनाई, परिश्रम, और अनेक प्रयास करते हुए भी असफलता का सामना करते हैं क्योंकी सूर्य निरंतरता का तथा अग्नि तत्त्व का कारक हैं और शनि वायु तत्त्व एवं धीमी गति का कारक हैं |

जन्मपत्रिका के भिन्न भिन्न भावो में यह युति/योग भिन्न परिणाम दर्शाते हैं जैसे यदि लग्न भाव में यह युति/योग हो तो विचार तथा शारीरिक क्रिया में भिन्नता का अनुभव होता हैं, यदि यह युति/योग धन भाव में स्थित हो तो जातक धन तथा भौतिकता में अनेक कष्ट पाते हैं |

तत्त्व के आधार पर दोनों एक दुसरे को पूरक होने चाहिए क्योंकि वायु से ही अग्नि बढती / टिकती हैं, पर यहाँ शनि का दूसरा कारकत्व जो की धीमापन हैं वो सूर्य के गति में बाधक हैं, इसी कारण सूर्य शनि की युति/योग जिनके पत्रिका में हो वह जातक जीवन में बड़ी कठिनाईयों का सामना करते हैं, कई बार सूर्य शनि युति/योग वाले जातक अन्यमनस्कता के कारण सफलता प्राप्त नहीं करते |

ऐसे जातकों को मनचाहे परिणाम प्राप्त करने हेतु जीवन में निरंतरता बनाये रखनी चाहिए, याने की एक लक्ष्य को विन्दु बनाकर आगे बढ़ना चाहिए और नकारात्मकता को दूर करने हेतु शिव पूजा करने से मन चाहे परिणाम प्राप्त करने में मदत मिलती हैं |

|| ॐ तत् सत ||
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