केस स्टडी

|| ॐ ||
|| श्री सदगुरु परमात्मने नमः ||

प्रश्न:

पिछले कुछ समय से मित्रो से संबंधो में तनाव आ गया हैं और घर में भी वातावरण ठीक नहीं हैं ?

जातक ने टेलीफोनिक कंसल्टेशन में यह प्रश्न किया (जातक मुझसे काफी समय से जुड़े हैं), जवाब में जब उनकी पत्रिका (साथ में अटेच हैं) देखी तो उत्तर स्पष्ट रूप से सामने आ गया और उन्होंने उसे स्वीकार भी किया,

ज्योतिषीय दृष्टी से मुख्य बाते :-
१. इन्हें राहू की महादशा शुरू है, राहू (भोग प्राप्ति की लालसा) पंचम भाव (वृद्धि / समृद्धि का भाव) में हैं जो नित नये विचार मन में उपजा रहा हैं | इस के कारण जातक कुछ नया शुरू करने की और उस काम से बड़ी कमाई की इच्छा कर रहे हैं |

२. राहू में बुध की अन्तर्दशा हैं जो पत्रिका में एकादश भाव (मित्र भाव) का स्वामी होकर व्यय स्थान में स्थित हैं एवं महादाशानाथ के षडाष्टक सम्बन्ध में हैं | इस योग से मित्रो से तनाव बढ़ रहा हैं |

३. बुध में शनि की प्रत्यंतर दशा हैं जो बुध से व्दिर्व्दादश योग में हैं | शनि इस पत्रिका में तृतीयेश व चतुर्थेश हैं जिससे इनको अती प्रयत्न के बाद भी सफलता नहीं मिल पा रही और घर का वातावरण बिगड़ रहा हैं |

जातक के दिमाग में करीब डेढ़ महीने (शनि की प्रत्यंतर दशा शुरू हुए करीब डेढ़ माह हुआ हैं) से हलचल मची हुई हैं और सतत नए विचार आते हैं पर काम नहीं बन पाते, इसी चक्कर में मित्रो से तनाव हो रहा हैं और घर में भी शांति (मनचाहे परिणाम) नहीं मिल रही हैं |

जन्म पत्रिका में ग्रहों एवं दशाओं के सही आकलन से जातक की परेशानी को जान पाना, साथ ही ज्योतिष के छोटे उपायों से परेशानी को दूर करना संभव हैं |

|| ॐ तत् सत ||
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