आध्यात्मिक विकास

|| ॐ ||
|| श्री सदगुरु परमात्मने नमः ||
 
ज्योतिष में सूर्य को जातक के आत्मिक, आध्यात्मिक एवं नैतिक विकास का कारक ग्रह माना गया हैं, साथ ही सूर्य का सीधा संबंध शारीरिक स्वास्थ्य से भी हैं, जब आपकी आत्मा सुसंस्कार प्राप्त हो तब ही उत्तम एवं नैतिक विचार प्राप्त होते हैं |
 
राशि कुंडली (D-1) में सूर्य की स्थिती आत्मा पर होने वाले प्रारंभिक संस्कार दर्शाती हैं और आध्यात्मिक पथ पर जातक की पगडण्डी निर्धारित करती हैं, यदि राशि कुंडली (D-1) में सूर्य दुस्थान (6,8,12) में स्थित हैं या पाप ग्रहों के सान्निध्य में हैं तब जातक निरन्तर भटकाववादी विचारधरा के लोगो के संपर्क में आकर खुद के आत्मिक, आध्यात्मिक एवं नैतिक विकास में बाधा पाते हैं, साथ ही शारीरिक स्वास्थ्य भी कमजोर होता हैं |
 
नवांश कुंडली (D-9) में सूर्य की शुभ स्थिती जातक के पूर्व जन्म कृत उच्च संस्कार दर्शाती हैं और आध्यात्मिक पथ में विकास की शुभ गति दर्शाती हैं |
 
विंशांश कुंडली (D-20) में सूर्य की शुभ स्थिती शुभ ग्रह सान्निध्य आध्यात्मिक गुरु का मार्गदर्शन, आध्यात्मिक दिशा निर्देश तथा दीक्षा प्राप्ति के योग दर्शाता हैं |
 
|| ॐ तत् सत ||
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